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Wednesday, 18 September 2013

विघ्नहारी गणपति


मूषक पर भ्रमण करने चला
मद-मस्त अपनी चाल में।
असुरों का संहार हो चला
पलक झपकते एक प्रहार में।।

उसका ब्रह्माण तो सिर्फ़ एक है
माता -पिता की छाया तले।
तीनों लोक का भ्रमण निष्कर्ष है
जो पाकर  भी कुछ न  मिले।।

है पूज्य जो सर्वप्रथम
होता है  जिसका सबसे पहले कथन।
उसके हृदय का द्वार  निष्पक्ष है
वह तो तेरे समक्ष है।


वह है गणपति गणेश गजनायक
विघ्नहारी विनाशकारक।।


गणपति बप्पा की जय हो।



4 comments:

  1. May Ganpati Bappa bestow immense happiness and joy in your & your near and dear one's life :)

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    Replies
    1. Thank you very much for your love, dear Ravindra! May God bless you! :)

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  2. Divine...You are too good in this genre.

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